
भारतीय जनता पार्टी का संगठनात्मक GPS एक नए मोड़ पर है — गंभीर मोड़ नहीं, ये महिला मोड़ है! सूत्रों की मानें तो पार्टी अब ‘महिला शक्ति’ को राष्ट्रीय स्तर पर कमान सौंपने की तैयारी में है। यानी, इस बार पार्टी की कमान पगड़ी वाले नहीं, पल्लू वाले थाम सकते हैं!
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महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष? मोदी की अगली सर्जिकल स्ट्राइक!
भाजपा और आरएसएस दोनों के बीच अब इस बात पर सहमति बनती दिख रही है कि संगठन में महिला चेहरा सिर्फ माइक पकड़ने के लिए नहीं, बल्कि पूरा संगठन पकड़ने के लिए चाहिए। माना जा रहा है कि यूपी में प्रदेश अध्यक्ष के चयन के तुरंत बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम की घोषणा होगी।
और इस बार, पार्टी नहीं चाहती कि सिर्फ महिलाएं वोट दें… अब पार्टी चाहती है कि महिलाएं आदेश भी दें!
टॉप तीन चेहरों की ‘संगठनिक तिकड़ी’
निर्मला सीतारमण: मैडम फाइनेंस, मैडम प्रेजिडेंट?
राजनीति की ‘सीए’ और बजट की ‘बॉस’ — निर्मला सीतारमण। तमिलनाडु की यह लो-प्रोफाइल लेकिन हाई-इम्पैक्ट नेता अब भाजपा की हाई-कुर्सी के लिए सबसे प्रबल दावेदार मानी जा रही हैं।
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केंद्र में अनुभव का खजाना
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अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की ब्रांड एंबेसडर
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और हाँ, South India की सेंधमारी की रणनीति की धुरी
अगर सीतारमण अध्यक्ष बनीं तो GST जैसा राजनीतिक संतुलन देखना तय है।

डी. पुरंदेश्वरी: सुषमा स्टाइल में वापसी?
आंध्र की इस नेत्री को लोग ‘Walking-Talking Parliament’ कहते हैं। बहुभाषीय, वंशानुगत नेता, और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भूमिका निभा चुकी — यानी महिला सशक्तिकरण का मूविंग पोस्टर।
अगर पुरंदेश्वरी चुनी गईं, तो भाजपा को मिलेगा सुषमा वर्जन 2.0, फुल पैकेज।
वनाथी श्रीनिवासन: वकील से अध्यक्ष पद तक की ‘लॉजिकल जर्नी’
तमिलनाडु से भाजपा की नई-नवेली स्टार वनाथी श्रीनिवासन, महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय चुनाव समिति की पहली तमिल महिला सदस्य रह चुकी हैं।
अगर ये चेहरा चुना गया, तो पार्टी का ‘मोर्चा’ भी बदलेगा और ‘चेहरा’ भी — वो भी ग्लोबल स्टाइल में।
क्या यह सिर्फ चुनावी स्टंट है?
नहीं। भाजपा की रणनीति में महिला अध्यक्ष की एंट्री सिर्फ सौंदर्य प्रसाधन नहीं, बल्कि समाजिक समीकरणों की गोल्डन चाबी है। विधानसभा से लेकर लोकसभा तक, महिला वोटरों ने भाजपा की नैया पार लगाई है। अब शायद बारी है उन्हें कमान थमाने की।
पगड़ी हटाओ, पल्लू सजाओ!
अगर सबकुछ योजना के मुताबिक चला, तो भाजपा 2025 में इतिहास रच सकती है — जब पहली बार कोई महिला नेता भाजपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेगी। और जब ऐसा होगा, तो यकीन मानिए, विपक्ष के लिए ये सिर्फ चुनाव नहीं, चक्रव्यूह साबित होगा।
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